सोमवार, 26 दिसंबर 2011

एक मंत्र 2

ॐ जिम्ह्श्ये चरितवे मघोन्या भोगये इष्टये राये उ त्वं.
दभ्रं पश्यद भ्य उर्विया विचक्ष उषा अजीगर्भुव्नानी विश्वा..

जो लोग रात्रि के चतुर्थ प्रहर उठकर शयन पर्यंत समय को व्यर्थ नहीं खोते वो सुखों को प्राप्त होते हैं अन्य नहीं.


आपका 
अनुभव शर्मा 

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