रविवार, 17 फ़रवरी 2019

भारत के अमर शहीदों के लिए शांति यज्ञ # पुलवामा

 भारत के अमर शहीदों के लिए शांति यज्ञ 


पुरवामा, कश्मीर में शहीद 40 अमर वीर  जवानों  के लिए आर्य समाज में आज स्वामी सत्यानन्द जी के ब्रह्मत्व में शान्ति यज्ञ किया गया। ब्र० अनुभव शर्मा उद्गाता व श्री रणधीर सिंह आर्य सपत्नीक यजमान रहे। यज्ञ साधिका समीति की बहनों ने भी यज्ञ में शिरकत की ।  पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाए गए व आतंकियों की निन्दा की गई।
ग्राम के सभी वर्ग के लोगों ने इस यज्ञ में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया। इस यज्ञ में ग्राम के विभिन्न परिवारों ने घृत, सामग्री आदि पदार्थ समर्पित किया। सभी ने भारतीय फौज के लिए परमात्मा से प्रार्थना की व यज्ञ अमर शहीदों व वर्तमान सेना को समर्पित किया।  अमन सिंह, प्रकाश वती जी, संतोष जी, वंशिका, सरोज जी, नैपाल सिंह, सुनील कुमार, हितांश आदि यज्ञ में उपस्थित थे।

परमात्मा उन अमर शहीदों की आत्मा को शान्ति प्रदान करें व उनके परिवार को उनकी भौतिक अनुपस्थिति से जूझने की क्षमता प्रदान करें यह उद्बोधन स्वामी सत्यानंद जी ने दिया।  उन वीरों की शहादत पर उनकी आंसू निकल आये।  उन्होंने हिन्दू जाति के सभी तबकों को आपस में मिल जुल कर, बुराइयों से दूर हो, देश के लिए महान व ऊँचे कार्यों को करने की सलाह दी।

अनुभव शर्मा ने बताया जैश टाइप आतंकी प्रशिक्षक भारत के मुसलमानों व अन्य पाकिस्तान के मुसलमानों को जन्नत व ७२ हूरों का लोभ देकर सिखाते हैं कि जा कुर्बान हो फिदाईन बन, और जब वह(उसका आत्मा)  अपने शरीर के परखच्चे उड़ा बैठता है तो शरीर में वापस आने की कोशिश करता है  परंतु सब कुछ खत्म हो जाता है। ना तो जन्नत मिलती और न ही अल्लाह। तब अल्लाह कहता है कि तूने वीरों व निहत्थों पर घात लगाया और कायराना पीठ पीछे हमला किया लिहाजा वह आत्मा भटकता रहता है। तब पता चलता है कि भारत ही तो जन्नत थी तब वह मोह वश व पाप के बोझ से तड़प तड़प कर जैश वगैरह को गाली देता हुआ भगवान के इशारे पर दोज़ख में सालों साल रह कबूतर, कुत्ता, सूवर और मुर्गा व बकरा बंन जमीन पर जन्म ले बार बार कटता है। जन्नत कहीं नहीं इसी ज़मीन पर है बाकी दोज़ख़ ही दोज़ख है। शुभ करम किए थे जो मानव बने और पाप कर कर के उसका फल भोगता ही है। किया कर्म भोगना ही पड़ता है ये परमात्मा और वेद का पत्थर की लकीर सा नियम है।

रणधीर सिंह आर्य ने पाकिस्तान द्वारा प्रायोजित जैश की आतंकी साजिश के द्वारा कराऐ इस कायराना हमले के लिए इसकी भर्त्सना की और आर्य वैदिक सिद्धांत की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि लोग आर्य समाज से जुड़ जाएं तो जीवन में हर क्षेत्र में उपलब्धि हांसिल कर सकते हैं और दुष्ट कर्मों से दूर रह सकते हैं । और कहा कि 1857 की क्रांति से लेकर 1947 तक व आज भी यह सिद्धांत सभी का पथ प्रदर्शन करता रहा है उन्होंने सभी से आर्य वैदिक सिद्धांत से जुड़ने का आह्वान किया।



जय हिन्द
वन्दे मातरम्
भारत माता की जय।

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